सड़क पर अकेली महिला- मौका या जिम्मेदारी? ( Sadak par akeli mahila -mauka ya jimmedari)

सड़क पर अकेली महिला- मौका या जिम्मेदारी? ( Sadak par akeli mahila -mauka ya jimmedari)

Reading Time: 2 minutes

हम आज अपने भारत देश की बात करते है तो हम कहते है कि हम आधुनिक भारत बनाने की ओर अग्रसर है परन्तु आज इक्कीसवी शताब्दी मे रहते हुए भी अपनी सोच को आधुनिक कर पाए जवाब होगा नही? हो सकता है आप मे से कई लोगो का जवाब हाँ भी हो परन्तु वह सिर्फ एक अपवाद ही माना जाएगा,आज भी हम दहेज प्रथा ओर सती प्रथा जैसी कुरीतियों से बाहर नही निकल पाए है। देश में आज महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ी बड़ी बातें होती है परंतु जमीनी सच्चाई कुछ और ही है।

आज भी रात को सुनसान सड़क पर चलती हुई लड़की हमें मिल जाए तो हम यह नही सोचेंगे कि हम किस प्रकार इसको सुरक्षित इसके घर पहुंचाए इसके विपरीत हम यह सोचते है अच्छा मौका है हालांकि आप मे से कुछ इसके विपरीत बोले परन्तु वास्तविकता क्या है वह मुझसे बेहतर आप जानते है,जबकि सड़क पर चलती हुई अकेली लड़की मौका नही हम सबकी जिम्मेदारी होनी चाहिए।

यहा एक बात पर गौर करना जरूरी है कि देश की राजधानी दिल्ली जहां हम हर बार चुनावी मौसम आने पर हवाई वादे सुनते है परन्तु क्या आज भी देश की राजधानी दिल्ली में महिलाएं सुरक्षित है ? कहने को सारा केन्द्रीय नेतृत्व में है साथ ही दिल्ली सरकार के मंत्री कई आला अधिकारी दिल्ली मे ही रहते है परन्तु क्या हम दिल्ली को सुरक्षित बना पाए? 90% लोगों का जवाब ना ही होगा।

अभी दिल्ली विधानसभा चुनाव खत्म हुए है और चुनावों में हर पार्टी के मुद्दों में महिला सुरक्षा का मुद्दा सबसे ऊपर रहा लेकिन फिर दिल्ली या किसी भी बड़े या छोटे शहर की बात करें तो एक महिला आज भी सड़क पर चलते हुए अपने आपको असुरक्षित ही महसूस करती है।

आप सबको 16 दिसंबर 2012 तो याद होगी। इस तारीख ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था जिसके बाद कई संगठन इंसाफ मांगने के लिए सड़कों पर उतरे लेकिन अगर ये सब लोग वह घिनोनी वारदात होने से पहले सड़कों पर उतरते तो 16 दिसंबर भी बाकी तारीखों के जैसे ही होती।इस वारदात के बाद कई लोगों ने उस मासूम लड़की को ही कई तरह की नसीहत दे डाली थी साथ ही कुछ बुद्धिजीवियों ने उसके कपड़ों पर भी सवाल उठाए थे। हम संसद से लेकर सड़क तक महिलाओं की सुरक्षा की बात करते है लेकिन क्या हम सच में महिलाओं को सुरक्षा दे पाए ये विचार करने योग्य बात है।

परंतु अब समय आ गया है हम अपने दकियानूसी विचारो से बाहर निकले। देश में महिला और पुरुष दोनों को समान अधिकार की बात करते है परंतु क्या वाकई समान अधिकार है ? जो आजादी एक पुरुष को है वहीं आजादी महिलाओं को भी मिलनी चाहिए क्यों एक लड़की घर से निकलते समय सोचती है कि मेरे कपड़े ठीक है? दुनिया की नजरें मुझे कैसे देखेंगी? क्या में सही सलामत वापस आ पाउंगी? जिस दिन हम ऐसे सब सवालों को खत्म कर पाए उस दिन हम वाकई एक न्यू इंडिया जरूर बनाएंगे।

महिलाओं के लिए कई कानून बनें परंतु कोई कड़े कानून नही बना सकते क्योंकि अगर महिलाओ के लिए कानून बन गए तो कई आम आदमी से नेता बने नामी हस्तियो को नागवार गुजरेगा ओर हम एक महिला की सुरक्षा के लिए कई नामी चेहरों को कुर्बान नही कर सकते ?

This Post Has 2 Comments

  1. Very true, we all should learn to respect and this is your responsibility to make feel every girl to be safe in everywhere and anytime.

Leave a Reply

Close Menu