मां कभी रिटायर नहीं होती (Maa Kabhi Retire Nahin Hoti)

मां कभी रिटायर नहीं होती (Maa Kabhi Retire Nahin Hoti)

Reading Time: 3 minutes

जिसका कोई अन्त नही,उसे आसमां कहते है।
जिसके प्यार का कोई अन्त नही उसे बस ‘मां’ कहते है।।”

‘मां’ एक शब्द नही वह खूबसूरत एहसास है जिसके इर्द-गिर्द एक बच्चे की सारी दुनिया छुपी होती है । मां एक ऐसी शख्सियत है इस दुनिया मे जिसे भगवान ने भी अपने से ऊंचा स्थान दिया है कहते है –
“मां को खुदा ने एक अज़मत कमाल दी
मां की दुआओ ने हर मुश्किल ही टाल दी
कुरान शरीफ मे मां की कुछ ऐसी मिसाल दी
उठाके जन्नत मां के कदमो मे ड़ाल दी।।”

मां शब्द सुनते ही हमारा रोम रोम सुरक्षा भरे प्यार के अहसास से भर जाता है,मां का प्यार अनमोल होता है वह दिन तारीख समय के हिसाब से नही आता मां तो दिन रात निरन्तर अपना स्नेह लुटाती रहती है फिर क्यो आज हम अपनी मां को प्यार केवल कुछ विशेष दिन ही करते है!जब भी मदर्स ड़े ( Mothers Day) आता है तो सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर मां के साथ सेल्फी खिंचकर ड़ालने वालो की जैसे बाढ सी आ जाती है, खूब मां की तारीफो में कसीदे पढे जाते है परन्तु यहा यह गौर करने वाली बात है कि क्या मां का सिर्फ एक ही दिन होता है या हमारी सोच उसी एक दिन तक सीमित हो गई है।

अरे मां के लिए कोई क्या एक दिन मुकर्रर करेगा मां तो सब दिन की है सब घंटो की है उसने तब से हमारी परवरिश की है ,जब इस आसमान के नीचे हमने आखं भी नही खोली थी।किसी गुमनाम शायर की चन्द पंक्तिया याद आती है कि –
“मां जैसी ममता किसी रिश्ते मे नही होती,सचमुच मां किसी फरिश्ते से कम नही होती। वैसे तो मां के नाम ‘ ‘शायरो ने पूरी दुनिया लिख ड़ाली किसी ने सुबह तो किसी ने शाम लिख ड़ाली’।बात करे उर्दू ग़जल की तो उर्दू ग़ज़ल में माँ पर सबसे ज़्यादा मुनव्वर राना साहब ने लिखा है. उनसे पहले ग़ज़ल में सब कुछ था. माशूक़, महबूब, हुस्न, साक़ी सब. तरक़्क़ी पसंद अदब और बग़ावत भी. पर मां नहीं थी. इसलिए उन्होने  कहा भी है कि,
मामूली एक कलम से कहां तक घसीट लाए
हम इस ग़ज़ल को कोठे से मां तक घसीट लाए“।

“रे पुत्र जब तू छोटा था तो मां की शय्या गिली करता था।अब बड़ा हुआ तो मां की आँखें गिली करता है। रे पुत्र तुझे मां को गीले मे रखने की आदत सी हो गई है क्या “।
यह पंक्तिया अपने आप मे बहुत कुछ बयां करती है ।आज हम इक्कीसवी सदी मे रहते  है बहुत माडर्न लाइफस्टाइल जीते है रोज होटलों मे अपने परिवार के साथ  खाना खाने जाते है परन्तु क्या हम यह सोचते है कि पीछे से घर मे मां भी भूखी है ? कभी हमने यह नहीं सोचा कि मा के हाथ पांव ठीक से काम नही करते तो वह खाना क्या बनाएगी क्या पता बेचारी लाचार मां पानी पीकर ही सो जाती होगी ,हम यह क्यो भूल गए कि बचपन मे हमे खाना खिलाने के लिए मां हमारे पीछे -पीछे भोजन की थाली लेकर घूमती थी हमे बहलाने के लिए कहानिया सुनाती थी लेकिन आज हमे सीरियल के किरदारो का तो सारा हाल मालूम है लेकिन मां का हाल पूछने की फुर्सत कहा है।हर ओरत चाहती है कि उसका बेटा श्रवण कुमार बने परन्तु पति को क्यो श्रवण कुमार नही बनने देना चाहती यह चिन्तन का विषय है।

कहते है पत्नी पसन्द से मिलती है लेकिन मां तो पुण्यो से मिलती है पसन्द से मिलने वाली के लिए पुण्य से मिलने वाली को कभी न ठुकराओ।जिस मां को पांच बेटे पेट में भारी नही लगते थे आज वो मां पांच बेटो को अलग अलग मकान मे भी भारी लगती है।अपने बच्चो के प्यार मे  मां का दिल हमेशा ताजे मक्खन की तरह होता है।मां अपने बच्चो का स्पर्श पाते ही त्वरित पिघलने लगती है,फिर बच्चे बड़े होकर उस ममतामयी के हृदय का स्पर्श पाकर क्यो मृदु नही हो पाते ? क्यो उनके हृदय पर इतनी कठोर परते जम जाती है कि कोशिश करने पर भी वह अपनी चिर परिचित मां के प्यार के सैलाब को नही समझ पाते ?पर मां अपने बच्चो पर क्या पोते पोतियो पर भी वही प्यार लुटाने को तैयार रहती है।

बढती उम्र मे अपने कमजोर  होते शरीर का हमे कभी एहसास भी नही होने देती।वह इसी उम्मीद मे जिए जाती है कि कभी तो मेरे प्यार की उष्णता मेरे बच्चो के हृदय को कोमल बना दे।इसी प्रतिक्षा मे मां अपने बच्चो की यादों ओर अपने अतीत के कुछ सुनहरे क्षणो को सहारा बनाकर अपने जीवन की अंतिम यात्रा के लिए निकल पड़ती है।

मां के प्यार को समर्पित कुछ भाव –
“एक मुद्दत से मेरी मां नही सोई,जब मैने एक बार रात मे कहा था -‘मां मुझे ड़र लगता है’।

इस आर्टिकल का कोई अंत नही है क्योकि मां का अंत मतलब पूरी दुनिया का अंत।

This Post Has 16 Comments

  1. Such a lovely article sir,,,, thanx for sharing this awesome article… #LoveUमां

  2. Nice one sameer bhai .

    ” मांग लूँ यह मन्नत की फिर वही जहान मिले फिर वही गोद फिर वही माँ मिले.”

  3. शायरी के जरिये अपने जज्बातों को आपने बहुत खूबसूरत तरीके से बयां किया और मेरी हौसलाअफजाई के लिए धन्यवाद अमित जी

  4. धन्यवाद ऋषभ जी। मेरे आर्टिकल के शब्द आपके दिल तक पहुंचे क्योंकि किसी की भी आंख में आंसू तभी आते है जब कोई बात उसके दिल में उतरती है। आशा है मेरी कलम से भविष्य में भी ऐसे ही आर्टिकल निकलते रहेंगे

  5. Maa anant hei..bas hi samajhkar bhi nasamajh ban jaate hein…

  6. Mom is the single biggest role model of our life….
    Mom’s love would be sinless…

  7. Can we have a translation option?
    Everyone is all praise and that really wants me to read the above write-up.

Leave a Reply

Close Menu