भारत की शान-हिन्दू और मुसलमान (bharat ki shaan-hindu aur musalman)

भारत की शान-हिन्दू और मुसलमान (bharat ki shaan-hindu aur musalman)

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“Wo tumhe hindu muslim batayenge

Tum bhartiya hone par ade rehna”

हमने जब से होश संभाला तब से हम यही सुनते आ रहे है “हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई आपस मे है भाई भाई ” कहते है इंसान जीवन मे  सही ओर गलत अपने घर से ही सीखता है । हमे कभी आज तक यह नही कहा गया कि यह मुस्लिम है इसके साथ मत बैठो ,तुम लोग एक थाली मे खाना नही खा सकते । हमेशा हमने यही सीखा है कि सब दोस्त है  सबके साथ प्रेम ओर सौहार्द्र से रहना चाहिए । फिर क्यो आज राजनितिक पृष्ठभूमि पर हम सबको बाटं दिया जाता है ? क्यो आज हमारी मानसिकता ऐसी हो गई है कि अगर यह मुसलमान है तो ये हमारा दुश्मन है ? हिन्दुस्तान मे हिन्दू ओर मुसलमान(hindu and muslim) के अलावा 36 बिरादरी रहती है फिर क्यो मुसलमानो के लिए इतनी नफरत  फैलाई जाती है । परन्तु राजनीतिक मंचो से फैलाई जा रही यह नफरत आज या कल की नही बल्कि जातिवाद के नाम पर बाटने की नीवं आजादी से पहले ही पड़ चुकी थी । तो ले चलते है समय के पहिए को इतिहास के उसी अध्याय पर ओर जानते है क्यों मुसलमान हिन्दुस्तान मे रहते हुए भी हिन्दुस्तान के नही है ।

कहते है हिन्दुस्तान को सोने की चिड़िया कहा जाता था ओर इतिहासकारो का तो यह भी कहना है कि हिन्दुस्तान की तरक्की को देखकर बाकी देशो की रातो की नींद हराम हो गई थी । वो किसी भी तरह हिन्दुस्तान की नींव को हिला कर उसे कमजोर बनाना चाहते थे । इसी क्रम मे सन् 1600 ई मे महारानी एलिजाबेथ से आज्ञा लेकर कुछ अंग्रेज व्यापारी हिन्दुस्तान मे व्यापार करने के लिए आए ओर उन्होने धीरे धीरे हिन्दुस्तान को अन्दर ही अन्दर खोखला करने का काम शुरू कर दिया  । उन्होने हमेशा फूट ड़ालो ओर राज करो की निति को अपनाया ओर एक समय ऐसा आया कि सोने की चिड़िया कहा जाने वाला देश अंग्रेजों का गुलाम हो गया । फिर उन्होने हिन्दुस्तान की जनता पर ऐसे ऐसे जुल्म किए जिनको उल्लेख करने मे आज मेरी कलम भी कापं रही है । आए दिन वह हमारी बहु बेटियो पर अत्याचार करते थे । इतिहास के पन्नो मे कही यह भी उल्लेख किया गया है कि रोज एक महिला अंगरेजो के जुल्म का शिकार होती थी ।

ब्रिटिश सरकार ने तो मौलवी अहमद शाह की मृत्यु के बाद उनके सिर को कोतवाली में लटका दिया था व मौलवी साहब को मौत के घाट उतारने वाले ओर उनके समर्थक पवन राजा जगन्नाथ सिंह को 5000 रु का इनाम भी दिया था  । यह उसी फूट का असर था जो अंग्रेजी हुकूमत ने हमारे देश की जनता के बीच ड़ाल दी थी । इसके बाद धीरे धीरे देश के अन्दर देश को आजाद कराने की मुहिम छिड़ी। ओर अंग्रेजों से लम्बी लड़ाई के बाद देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था । जिस आजादी के लिए नौजवान भगत फांसी पर चढ़ गये, महात्मा गांधी ने अपना सब सुख त्यागकर देश की आजादी की लड़ाई का संचालन किया, लेकिन जो देश आजाद हुआ, जिस स्थिति में देश आजाद हुआ, क्या उसी आजादी के लिए लोग लड़े थे। यह कही न कही देश की राजनीति पर सवालिया निशान खड़ा करता है । 15 अगस्त के दिन जब देश आजाद हुआ तो इस आजादी की लड़ाई के संचालक महात्मा गांधी कलकता के नोआखली में हिन्दू-मुस्लिम के दंगें को खत्म करा रहे थे। कलकता से लेकर पूर्वी और पश्चिम  पंजाब में दंगा फैला हुआ था। दिल्ली की सडकों पर एक तरफ ख़ुशी का महौल था तो दूसरी तरफ लाशें पड़ी थी और औरतों की अस्मत लूटी जा रही थी।

जुलाई 1947 से देश में दंगे शुरू हो गये थे। पश्चिम  पाकिस्तान से हिन्दुओं और सिखों को खत्म किया जा रहा था, जबकि पूर्वी पाकिस्तान से मुसलमानों को। मद्रास के सप्ताहिक स्वतंत्र पत्रिका के पंजाब सम्वाददाता ने लिखा कि  ‘शरणार्थियों के लिए चलाई गई एक विशेष रेलगाड़ी जो बिलकुल ही खाली थी, फिरोजपुर स्टेशन में दोपहर को प्रवेश कर रही थी। ट्रेन का ड्राईवर डर से पीला पड़ा हुआ था और गार्ड की उसके कम्पार्टमेंट  में हत्या कर दी गई थी। इंजन में कोयला डालने वाले ड्राईवर का सहयक गायब था. मैं प्लेटफार्म की तरफ गया. ट्रेन के दो डब्बों को छोडकर सभी खून से भरे हुए थे।तीसरे दर्जे के डिब्बे में खून से सने तीन शव फर्श पर पर पड़े थे।लाहौर और फिरोजपुर के बीच मुसलमानों की हथियार बंद भीड़ ने ट्रेन को रोककर उन सभी लोगो को मार दिया था । दुनिया के इतिहास में इतने कम समय में करोड़ों की संख्या में लोगों का विस्थापन हो रहा था। भारत की आजादी के लिए शुरू हुआ आन्दोलन भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद खत्म हो रहा था।

 

विभाजन के दौरान हुई हिंसा में करीब 5 लाख लोग मारे गए और तकरीबन 1.45 करोड़ शरणार्थियों ने अपना घर-बार छोड़कर इधर से उधर हुए। 1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए।धर्म के नाम पर देश बन गया था और कत्लेआम का कारण यहीं था। हिन्दू –मुसलमान एक दुसरे के खून के प्यासे बने हुए थे। कत्लेआम करने वालों कम थे पर तब इन्हीं का बोलबाला था। विभाजन के दौरान 10 हजार से ज्‍यादा महिलाओं का अपहरण किया गया, और उनके साथ बलात्‍कार हुआ. लाखों बच्चे अनाथ हो गए ओर कई मारे गए।

विभाजन सिर्फ भारत-पाकिस्तान का नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं का भी हुआ था। लोगों का एक दूसरे पर अविश्वास बढ़ गया था। लोग खुश तो थे पर दिलों में गम और आँखों में आसूं लिए। सैकड़ों सालों से साथ रहते आ रहे हिन्दू-मुस्लिम साथ नहीं रह सकते थे  यह बदख्याल ना जाने क्यूँ आया था नेताओं को। भारत का विभाजन हुआ, पाकिस्तान बना और आज पाकिस्तान से ज्यादा मुसलमान भारत में हिन्दुओं के साथ रह रहे हैं। काश यह बदख्याल ना आया होता ओर जो नरसंहार हुआ वह रूक जाता ।

राजनिति का यह नंगा नाच आज 70 साल बाद भी चला आ रहा है । आज भी चन्द वोट पाने के लिए कुछ नेता हिन्दुओ को मुसलमानो के खिलाफ ओर मुसलमानो को हिन्दुओ के खिलाफ भड़का रहे  है । परन्तु अब वक्त आ गया है कि इस नंगे नाच को बन्द किया जाए । ओर अब हम लोगो को भी यह समझना होगा कि बंटवारे के नाम पर राजनिति करने वाले इन नेताओ को इनकी असली ओकात दिखायी जाए । वरना भारत को पन्द्रह अगस्त 1947 को आजादी तो मिली लेकिन जो आज़ादी मिली वो भगत, गांधी, आजाद और राम प्रसाद बिस्मिल की आज़ादी के ख्वाबों का कत्ल ही माना जायेगा।क्योकि उन्होने कभी ऐसे भारत का सपना नही देखा था । जहा हिन्दू ओर मुसलमान एक दूसरे के खून के प्यासे हो ।

धन्यवाद

समीर चौधरी

(Sameer Chaudhary)

This Post Has 19 Comments

  1. Very Nice article sameer ji.

  2. Bahut hi gehraayi se likha gaya vishleshan. Behtareen!

  3. बहुत बढ़िया प्रयास इसमें हम आपके साथ है भाई ऐसी सोच अगर हर हिंदुस्तानी की हो जाये तो हम असल में आजाद हो जायेंगे

  4. Very true, this is what that we all should know about Struggle behind Independence and grand salute for our heros of nation. #INDIAN

  5. राणा जी आप जैसे बड़े भाइयों के साथ से ही हम कामयाब होंगे

  6. Hat’s off!!!
    Totally agree with your thoughts..

  7. Nice article. Today we need these type of articles in plenty otherwise the netizens will know only what the messages on hatred want to spread and will succeed.
    All the best.

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