पिता का खत

पिता का खत

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वह हर मुसीबत के सामने चट्टान की तरह खड़ा हो जाता है,वह सबके चेहरे पर खुशी लाने के लिए कुछ भी कर सकता है ,वह है तो दुनिया के सब खिलोने अपने लगते है।यहां बात हो रही है उस महान शख्सियत की जिसे हम लोग पिता कहकर पुकारते है।

              “चट्टानों सी हिम्मत और
         जज्बातों का तुफान लिए चलता है,
            पूरा करने की जिद से ‘पिता’
       दिल में बच्चों के अरमान लिए चलता है।”

“पिता” ईश्वर के द्वारा बनाया गया वह अनमोल हीरा है जिसका मूल्य लगाना इस संसार मे किसी जौहरी के बस की बात नही। जब एक छोटा बच्चा इस संसार मे जन्म लेता है तो वह सबसे पहले माँ शब्द ही बोलना सीखता है और माँ कि छाया में ही बड़ा होता है लेकिन घर में पिता वो इंसान है,जो कभी प्यार को दर्शाते नहीं है पर माँ से भी बढ़कर अपने बच्चों को प्यार करते हैं। माँ घर में रोटी बनाती है तो पिता कड़ी धूप में पैसा कमाता है, माँ बच्चे को पढ़ाती है तो पिता बच्चे को शिक्षा देता है। एक पिता जितनी कुर्बानी देना आसान बात नहीं, फटे जूते पहन बच्चों को नए कपड़े दिलाता है ,लेकिन कभी अपना प्रेम नहीं दर्शाता है , माँ लाख बार बोले मेरा बेटा..मेरी बेटी पर जीवन जीना तो पिता ही सिखाता है। इस संसार मे पिता को भगवान ने बहुत मजबूत दिल दिया है  लाख परेशानियां आ जाए  परन्तु पिता कभी कोई शिकायत नही करता।

शर्ट मे चाहे चार छेद हो जाए लेकिन अपने से पहले बच्चों के लिए नए कपड़े सिलवाता है ,अपने आप चाहे बिक जाना पड़े लेकिन बच्चो को एक अच्छी जिन्दगी देने के लिए कोई कमी नही छोड़ता ,पिता जीवन भर हमारे सपनो को पूरा करने के लिए अपने सपनो की आहूति देता है ! हर पिता यह चाहता है कि जिस चीज के अभाव का सामना उसे बचपन में करना पड़ा ,उसके लख्ते जिगर को न करना पड़े। इतना सब कुछ करने के बावजूद जीवन मे कभी न कभी पिता को अपने पुत्र से एक कटु वाक्य सुनना ही पड़ता है कि आपने मेरे लिए किया ही क्या है ? क्यो हम जीवन भर अपने पिता के बलिदानो को नही समझ पाते। पिता को समुद्र के जितना गहरा बताया गया है वह जीवन भर देता है कभी कुछ नही मागंता।
कहते है –
हर दुःख हर दर्द को वो,हंस कर झेल जाता है,
बच्चों पर मुसीबत आती है,तो पिता मौत से भी खेल जाता है।”

परन्तु जीवन मे एक समय ऐसा भी आता है जब हमे अपने पिता को भी समझना होता है लेकिन हम क्यों उन्हे समझ नही पाते?इस विषय पर एक गहन चिंतन करना आवश्यक है।आपके समक्ष एक पिता के वह भावुक लम्हे रख रहा हूं जो उसने अपने पुत्र से एक  खत के माध्यम से साझा किए।

मेरे प्यारे बच्चो,

अभी तुम उम्र के इस पड़ाव मे यह न समझ पाओ जो मै तुमसे इस चिठ्ठी के माध्यम से कहना चाहता हूं।

      लेकिन अभी मै बहुत सी बातों के बारे मे सोच रहा हूं।बच्चो, समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है ओर अपने आसपास कई किरदारो को मैने बदलते देखा है। हो सकता है कि तुम अभी न समझ पाओ कि मै तुमसे क्या कहना चाहता हूं लेकिन एक दिन तुम इन सब बातों  की गहराई को समझोगे।
बच्चो जिस दिन तुम्हे यह लगे कि मै बूढ़ा हो गया हूँ,तुम खुद मै थोड़ा धीरज लाना ओर मुझे समझने की कोशिश करना।
जब खाना खाते समय मुझसे कुछ गिर जाए ओर जब मुझसे कपड़े सहेजते न  बने तो थोड़ा सब्र करना ओर उस वक्त को याद करना जब मैने तुम्हे यह सब सिखाने मे कितना समय लगाया था।
मै कभी एक ही बात को बार -बार दोहराने लगूँ तो टोकना मत मेरी बाते सुनना। जब तुम छोटे थे तो हर रात एक ही कहानी बार-बार सुनाने के लिए कहते थे ओर मै ऐसे ही करता था जब तक तुम सो नही जाते थे।
यदि मै नया मोबाइल, कम्प्यूटर न चलाना सीख पाऊं तो मुझपे हसना मत। थोड़ा वक्त दे देना। शायद मुझे यह सब चलाना आ जाए।
बढती उम्र के कारण यदि मेरी याददाश्त कमजोर हो जाए तो मुझे उस बात को याद करने का मौका देना। मै कभी भूल जाऊ तो झुझलाना मत,क्योकि तुम्हे उस समय अपने पास पाना मेरी सबसे बड़ी खुशी होगी।
एक दिन ऐसा आएगा में चार कदम चलने से भी लाचार हो जाऊंगा तो तुम उस दिन मुझे मजबूती से सहारा लेना जैसे मै तुम्हे बचपन मे देता था।
फिर एक दिन ऐसा भी आएगा जब मै तुम्हे कहूँगा ‘मेरा अंत समय निकट है’ यह सुनकर तुम नाराज़ मत  होना क्योंकि एक दिन तुम भी यह जान जाओगे कि वृद्धजन ऐसा क्यू कहते है।यह समझने की कोशिश करना कि एक उम्र के बाद लोग जीते नही है बल्कि अपना समय काटते है।

अपने प्रेम और धीरज का सहारा देकर मुझे जिन्दगी के आखिरी पड़ाव तक थामे रहना,तुम्हारी प्रेमपूर्ण मुस्कान ही मेरा सम्बल होगी।

तुम्हारा पिता

“बेमतलब सी इस दुनिया में,वो ही हमारी शान है,
किसी शख्स के वजूद की,‘पिता’ ही पहली पहचान है।

किसी रिश्ते को समझने के लिए कभी देर नही होती अपने पिता का सम्मान करे ओर उनको समझने की कोशिश करे । पिता अपने पुत्र को राज प्रदान नहीं कर सकता परन्तु हर पुत्र का कर्त्तव्य है की वो पिता को राजसुख प्रदान करने की हर संभव कोशिश करे। तो आज ही जुट जाए अपने पिता के सपनो को पूरा करने मे ऐसा करने के बाद आपको जिस सच्चे सुख की अनुभूति होगी  उसे शब्दो मे बयां करना मुश्किल ही नही नामुमकिन है।

पिता को समर्पित कुछ भाव-:

“जलती धूप में वो आरामदायक छाँव है
मेलों में कंधे पर लेकर चलने वाला पाँव है,
मिलती है जिंदगी में हर ख़ुशी उसके होने से
कभी भी उल्टा नहीं पड़ता ‘पिता’ वो दांव है।”

धन्यवाद
समीर चौधरी

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